विस्तृत उत्तर
संन्यास योग = कुंडली में ऐसी स्थिति जो व्यक्ति को सांसारिक जीवन से विरक्ति + आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाए।
कैसे बनता
- ▸4+ ग्रह एक भाव में (ग्रह संकुल = वैराग्य)।
- ▸शनि+चंद्र संबंध (विशेषतः 1/4/10 में) = मन विरक्त।
- ▸केतु लग्न/1/9/12 में मजबूत = मोक्ष/वैराग्य।
- ▸12वाँ भाव (मोक्ष भाव) में शुभ ग्रह।
- ▸9वाँ भाव (धर्म) + 12वाँ (मोक्ष) स्वामी संबंध।
- ▸गुरु+केतु युति = ज्ञान+वैराग्य।
उदाहरण: आदि शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद, रमण महर्षि — सभी कुंडलियों में संन्यास योग।
⚠️ संन्यास योग = संन्यास अनिवार्य नहीं। आधुनिक जीवन में = गहरी आध्यात्मिक रुचि, ध्यान/योग प्रवृत्ति, सांसारिक मोह कम।
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कैसे बनता
- 4+ ग्रह एक भाव में (ग्रह संकुल = वैराग्य)। - शनि+चंद्र संबंध (विशेषतः 1/4/10 में) = मन विरक्त। - केतु लग्न/1/9/12 में मजबूत = मोक्ष/वैराग्य। - 12वाँ भाव (मोक्ष भाव) में शुभ ग्रह। - 9वाँ भाव (धर्म) + 12वाँ (मोक्ष) स्वामी संबंध। - गुरु+केतु युति = ज्ञान+वैराग्य।
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