विस्तृत उत्तर
जन्म कुंडली = जन्म समय/स्थान अनुसार ग्रहों की स्थिति का मानचित्र।
जरूरी क्यों (ज्योतिष मत)
- 1विवाह मिलान — कुंडली = अनिवार्य।
- 2दोष पहचान — मंगल/कालसर्प/शनि दोष।
- 3मुहूर्त — शुभ कार्यों का सही समय।
- 4भविष्य मार्गदर्शन — महादशा, गोचर।
जरूरी नहीं (भक्ति/तार्किक मत)
- 1गीता 18.66 — 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' — ईश्वर शरणागति = सर्वोपरि।
- 2कर्म > ग्रह। ग्रह = कर्म संकेतक; कर्म बदलो = भाग्य बदले।
- 3अनेक लोग बिना कुंडली सफल = वैज्ञानिक प्रमाण अभाव।
व्यावहारिक: बनवा लें — हानि नहीं; विवाह/मुहूर्त में काम आएगी। जन्म समय + स्थान = ज्योतिषी/ऑनलाइन। परंतु कुंडली = जीवन नियंत्रक न बनाएं।


