विस्तृत उत्तर
अत्यंत संवेदनशील और व्यक्तिगत प्रश्न। ईमानदारी से दोनों पक्ष:
ज्योतिष मत (कुंडली मिलान = अनिवार्य)
- ▸कम गुण/दोष = दांपत्य कलह, संतान समस्या।
- ▸ज्योतिषी विश्लेषण → दोष निवारण पूजा → फिर विवाह = एक विकल्प।
भक्ति/प्रगतिशील मत
- ▸राम-सीता = कुंडली मिलान नहीं हुआ (स्वयंवर)।
- ▸शिव-पार्वती = पार्वती ने तपस्या से शिव प्राप्त किए, कुंडली नहीं।
- ▸प्रेम, सम्मान, संगतता (compatibility) = कुंडली से अधिक महत्वपूर्ण।
- ▸अनेक सफल विवाह = कुंडली मिलान के बिना।
- ▸अनेक असफल विवाह = 36/36 गुण मिलने के बावजूद।
संतुलित सुझाव
- 1कुंडली मिलान = एक मार्गदर्शक; अंतिम निर्णय नहीं।
- 2दोनों परिवार सहमत + वर-वधू प्रसन्न = सबसे महत्वपूर्ण।
- 3दोष हो तो निवारण पूजा कराएं।
- 4केवल कुंडली के आधार पर अच्छा रिश्ता न टूटे — यह भी ध्यान रखें।
स्पष्टीकरण: कुंडली मिलान = परंपरा; शास्त्रीय अनिवार्यता विवादित। विवाह = दो व्यक्तियों का निर्णय + ईश्वर कृपा।





