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पितृ ज्ञान📜 ज्योतिष शास्त्र, गरुड़ पुराण (Webdunia verified)1 मिनट पठन

पितृ दोष क्या है और कैसे पहचानें?

संक्षिप्त उत्तर

पितृ दोष = पितरों की अतृप्ति से कुंडली दोष। कुंडली: 9वें भाव में राहु/केतु/शनि। लक्षण: संतान कष्ट, विवाह बाधा, कलह, आर्थिक कष्ट, सपने में दुखी पितर। निवारण: श्राद्ध, गया पिंडदान, नारायण बलि।

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विस्तृत उत्तर

पितृ दोष ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का एक दोष है जो पूर्वजों (पितरों) की अतृप्ति/नाराजगी के कारण उत्पन्न होता है।

कारण

  • पितरों का श्राद्ध/तर्पण न करना।
  • पूर्वजों का अपमान/उपेक्षा।
  • पूर्व जन्म के अधूरे पितृ कर्म।
  • परिवार में किसी की अकाल मृत्यु और उचित संस्कार न होना।

कुंडली में पहचान (ज्योतिष)

  • 9वें भाव (पितृ स्थान) में राहु/केतु/शनि।
  • सूर्य पीड़ित (सूर्य = पिता का कारक)।
  • 9वें भाव का स्वामी कमजोर/अशुभ ग्रहों से पीड़ित।

लक्षण (बिना कुंडली)

  • परिवार में लगातार समस्याएँ (कलह, बीमारी, आर्थिक कष्ट)।
  • संतान सुख न होना या संतान में कष्ट।
  • विवाह में बार-बार बाधा।
  • सपने में पितर दुखी/भूखे/प्यासे दिखें।
  • तुलसी/पीपल बार-बार सूखे।
  • कोई भी शुभ कार्य पूर्ण न हो।

निवारण: श्राद्ध, तर्पण, गया पिंडदान, नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध। विस्तार से अगले प्रश्नों में।

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शास्त्रीय स्रोत
ज्योतिष शास्त्र, गरुड़ पुराण (Webdunia verified)
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