विस्तृत उत्तर
पितृ दोष ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का एक दोष है जो पूर्वजों (पितरों) की अतृप्ति/नाराजगी के कारण उत्पन्न होता है।
कारण
- ▸पितरों का श्राद्ध/तर्पण न करना।
- ▸पूर्वजों का अपमान/उपेक्षा।
- ▸पूर्व जन्म के अधूरे पितृ कर्म।
- ▸परिवार में किसी की अकाल मृत्यु और उचित संस्कार न होना।
कुंडली में पहचान (ज्योतिष)
- ▸9वें भाव (पितृ स्थान) में राहु/केतु/शनि।
- ▸सूर्य पीड़ित (सूर्य = पिता का कारक)।
- ▸9वें भाव का स्वामी कमजोर/अशुभ ग्रहों से पीड़ित।
लक्षण (बिना कुंडली)
- ▸परिवार में लगातार समस्याएँ (कलह, बीमारी, आर्थिक कष्ट)।
- ▸संतान सुख न होना या संतान में कष्ट।
- ▸विवाह में बार-बार बाधा।
- ▸सपने में पितर दुखी/भूखे/प्यासे दिखें।
- ▸तुलसी/पीपल बार-बार सूखे।
- ▸कोई भी शुभ कार्य पूर्ण न हो।
निवारण: श्राद्ध, तर्पण, गया पिंडदान, नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध। विस्तार से अगले प्रश्नों में।





