विस्तृत उत्तर
नीच भंग राजयोग = ग्रह नीच राशि में पर उसकी नीचता भंग (समाप्त) = राजयोग में बदल।
कब बनता (प्रमुख नियम)
- 1नीच ग्रह जिस राशि में → उस राशि स्वामी उसे देख रहा।
- 2नीच ग्रह जिस राशि में → उस राशि स्वामी केंद्र (1/4/7/10) में।
- 3नीच ग्रह उच्च ग्रह के साथ युति।
- 4नीच ग्रह को शुभ ग्रह दृष्टि।
उदाहरण: शनि मेष (नीच) में → मंगल (मेष स्वामी) केंद्र/दृष्टि → शनि नीच भंग → राजयोग।
प्रभाव: रंक से राजा, प्रतिकूलता से उत्कर्ष, संघर्ष के बाद असाधारण सफलता। बहुत से self-made सफल लोगों की कुंडली में यह योग।
⚠️ नीच भंग = जटिल गणना। कई शर्तें एक साथ पूरी हों तभी। ज्योतिषी से पुष्टि अनिवार्य।





