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विस्तृत उत्तर
तलातल लोक से वैराग्य का संदेश मिलता है कि भोग-विलास, शक्ति और धन चाहे स्वर्ग से भी अधिक क्यों न हों, वे शाश्वत नहीं हैं। तलातल में जीव रोग, वृद्धावस्था और दरिद्रता से रहित होकर हजारों वर्षों तक सुख भोगते हैं, लेकिन यह सुख पुण्य समाप्त होने तक ही रहता है। पुण्य क्षय होने पर उन्हें फिर पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है। इसलिए वैराग्य और ईश्वर-समर्पण के बिना भौतिक सुख जन्म-मरण के चक्र से मुक्त नहीं करते।
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