विस्तृत उत्तर
इंद्र का वज्र हिंदू पुराणों के सर्वाधिक शक्तिशाली अस्त्रों में गिना जाता है।
भगवद्गीता में महत्ता — स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है — 'आयुधानामहं वज्रम्' — अर्थात समस्त अस्त्र-शस्त्रों में मैं वज्र हूँ। यह वज्र की सर्वोच्चता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
शक्ति — वज्र इतना शक्तिशाली था कि जिस वृत्रासुर को किसी भी देव-दानव का अस्त्र नहीं हरा सकता था, उसका वध वज्र से हुआ। इसकी तीव्रता बिजली के समान थी — इसीलिए इंद्र 'वज्रधारी' और 'वज्रपाणि' भी कहलाते हैं।
शक्ति के तीन स्रोत — श्रीमद्भागवत में वर्णित है कि वज्र में तीन दिव्य शक्तियाँ समाहित थीं — (1) भगवान नारायण की शक्ति, (2) महर्षि दधीचि की कठोर तपस्या का ब्रह्म-तेज और (3) इंद्र का स्वयं का प्रारब्ध। इन तीनों शक्तियों का संगम ही वज्र को अजेय बनाता था।
प्रतीक — वज्र आज भी शक्ति, साहस और दृढ़ता का प्रतीक है। बौद्ध और हिन्दू दोनों परंपराओं में वज्र की महत्ता है।





