विस्तृत उत्तर
ब्रह्मास्त्र एक मांत्रिक दिव्यास्त्र था — अर्थात इसे विशेष मंत्रों के उच्चारण से संधान (चलाया) किया जाता था।
चलाने की विधि — ब्रह्मास्त्र को मंत्र से अभिमंत्रित कर धनुष से बाण के रूप में चलाया जाता था। जो योद्धा इस अस्त्र को धारण करता था, उसे पहले कठोर तपस्या और गुरु से दीक्षा लेनी होती थी। मंत्र का ज्ञान और उसे सिद्ध करने की विधि गुरु-शिष्य परंपरा में प्रदान की जाती थी।
महाभारत में वर्णन — महाभारत में उल्लेख है कि जब ब्रह्मास्त्र चलाया जाता था तो आकाश में प्रचंड ज्वाला उत्पन्न होती थी, धरती काँपने लगती थी और भयंकर शब्द होता था। महाभारत के श्लोक (8-10-14) में इसका वर्णन है: 'तदस्त्रं प्रजज्वाल महाज्वालं तेजोमंडल संवृतम।'
मंत्र की शक्ति — यह अस्त्र मंत्र की शक्ति से संचालित था इसलिए इसे 'दिव्यास्त्र' या 'मांत्रिक-अस्त्र' की श्रेणी में रखा गया है। जिसे इसका मंत्र याद था वह इसे वापस भी ले सकता था।





