विस्तृत उत्तर
सभी राजाओं ने धनुष उठाने का भरपूर प्रयास किया पर कोई भी उसे हिला तक नहीं सका।
चौपाई — 'भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरइ न टारा॥'
इसका अर्थ — दस हज़ार राजा एक साथ मिलकर उसे उठाने लगे, पर वह टस-से-मस नहीं हुआ।
प्रभु (रामजी) को देखकर सब राजा हृदयमें हार गये — 'प्रभुहि देखि सब नृप हियँ हारे। जनु राकेस उदय भएँ तारे' — जैसे पूर्ण चन्द्रमाके उदय होनेपर तारे प्रकाशहीन हो जाते हैं। सबके मनमें यह विश्वास हो गया कि रामजी ही धनुष तोड़ेंगे।

