का सरल उत्तर
ब्रह्मास्त्र को विशेष मंत्रों से अभिमंत्रित कर धनुष से चलाया जाता था। गुरु-शिष्य परंपरा में मंत्र-दीक्षा मिलने के बाद ही इसका संधान संभव था। मंत्र जानने वाला इसे वापस भी ले सकता था।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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