विस्तृत उत्तर
इस चौपाई का अर्थ — दस हज़ार राजा एक साथ मिलकर (शिवजी के धनुष को) उठाने लगे, पर वह टस-से-मस नहीं हुआ (टरइ न टारा = हिला नहीं, टला नहीं)।
यह दृश्य धनुष-यज्ञ की सभा का है जहाँ अनेक बलवान राजा आये थे। सबने अपना पूरा बल लगाया पर शिवजी का धनुष इतना भारी और दिव्य था कि कोई उसे उठा नहीं सका — हिला तक नहीं सका।
इसके बाद राजा जनक ने निराश होकर कहा कि पृथ्वी वीरविहीन हो गयी — जिस पर लक्ष्मणजी को बड़ा क्रोध आया।





