रामचरितमानस — बालकाण्ड'भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप' — इसका अर्थ?अर्थ — भक्तों के लिये भगवान ने राजा (मनुष्य) का शरीर धारण किया। भक्त-प्रेम ही अवतार का मूल कारण।#बालकाण्ड#भगत हेतु#राम
रामचरितमानस — बालकाण्ड'भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरइ न टारा' — इसका अर्थ?अर्थ — दस हज़ार राजा एक साथ उठाने लगे पर धनुष टस-से-मस नहीं हुआ। शिवजी का धनुष इतना भारी और दिव्य कि कोई हिला तक नहीं सका। इसके बाद जनक ने निराश वाणी कही।#बालकाण्ड#दोहा अर्थ#दस हज़ार राजा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार' — इसका अर्थ?अर्थ — ब्राह्मण, गौ, देवता और संतों के लिये भगवान ने मनुष्य अवतार लिया। उनका शरीर माया-गुणों से परे, स्वेच्छा से निर्मित है।#बालकाण्ड#दोहा अर्थ#मनुज अवतार
रामचरितमानस — बालकाण्ड'असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु' — इसका अर्थ?अर्थ — भगवान असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, अपने वेदरूपी सेतु (धर्ममार्ग) की रक्षा करते हैं और जगत में निर्मल यश फैलाते हैं — यही श्रीराम जन्म का कारण है। 'श्रुति सेतु' = वेदमार्ग/धर्ममार्ग।#बालकाण्ड#दोहा अर्थ#अवतार उद्देश्य