विस्तृत उत्तर
इस दोहे का अर्थ — ब्राह्मण, गौ, देवता और संतों के लिये (उनकी रक्षा हेतु) भगवान ने मनुष्य का अवतार लिया।
पूरा दोहा — 'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार। निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार॥'
अर्थ — भगवान का शरीर माया और गुणों (सत्, रज, तम) से परे है, अपनी इच्छा से निर्मित है — कर्मबन्धन से नहीं। अवतार का उद्देश्य — ब्राह्मण, गौ, देवता और संतों की रक्षा।





