विस्तृत उत्तर
अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र प्रयोग के पीछे उनके पिता द्रोणाचार्य की मृत्यु का प्रतिशोध था।
कारण — महाभारत के युद्ध में पांडवों ने झूठी अफवाह फैलाई कि 'अश्वत्थामा मारा गया' जिससे द्रोणाचार्य ने शस्त्र त्याग दिए और उनका अनुचित वध हुआ। इस कूटनीतिक छल से अश्वत्थामा अत्यंत क्रोधित और व्यथित हो गए।
रात्रि-आक्रमण — युद्ध समाप्त होने के बाद अश्वत्थामा ने कृपाचार्य और कृतवर्मा के साथ पांडव-शिविर पर रात्रि में आक्रमण किया और पांडुपुत्रों (पांचों पांडवों के द्रौपदी से जन्मे पुत्रों) का वध कर दिया।
ब्रह्मास्त्र का प्रयोग — जब पांडवों ने अश्वत्थामा को पकड़ा तो उसने पांडव-वंश के समूल नाश के लिए उत्तरा के गर्भ में पल रहे अभिमन्यु-पुत्र परीक्षित पर ब्रह्मास्त्र चलाया।
परिणाम — श्रीकृष्ण ने गर्भस्थ शिशु को बचाया। अश्वत्थामा के माथे की दिव्यमणि छीनकर उसे युगों-युगों तक कोढ़ और घाव सहित भटकने का श्राप दिया।





