विस्तृत उत्तर
हिन्दू पौराणिक कथाओं में अस्त्र केवल युद्ध के हथियार नहीं हैं; वे दिव्य शक्ति का विस्तार हैं, जो ब्रह्मांडीय नियमों (धर्म) द्वारा शासित होते हैं। इन दिव्य अस्त्रों में वज्रास्त्र एक ऐसा अस्त्र है जिसका नाम ही भय और सम्मान दोनों पैदा करता है। यह देवों के राजा इंद्र का व्यक्तिगत आयुध है, जो उनके अधिकार और अदम्य शक्ति का प्रतीक है। इसका जन्म महर्षि दधीचि के परम बलिदान से हुआ और इसे देवशिल्पी विश्वकर्मा ने बनाया। यह त्याग, शक्ति और धर्म की गाथा का प्रतीक है।
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