विस्तृत उत्तर
महाभारत के सौप्तिक पर्व (अध्याय 13-15) में ब्रह्मास्त्र के भयावह परिणामों का विस्तृत वर्णन है।
तत्काल प्रभाव — ब्रह्मास्त्र चलने पर भयंकर प्रलयाग्नि उत्पन्न होती है। आकाश में महाज्वाला और तेजोमंडल दिखाई देता है, भयानक शब्द होता है, पृथ्वी काँपती है, समुद्र उबलने लगता है। जीव-जंतु, वनस्पति और समस्त चर-अचर का नाश होता है।
दीर्घकालिक प्रभाव — जहाँ ब्रह्मास्त्र चलाया जाए वहाँ 12 वर्षों तक वर्षा नहीं होती और भयंकर दुर्भिक्ष पड़ता है। भूमि बंजर और जनशून्य हो जाती है। सन्तान-हीनता फैलती है।
दो ब्रह्मास्त्र एक साथ — यदि दो ब्रह्मास्त्र आपस में टकराएं तो संपूर्ण पृथ्वी के नाश का भय है। इसीलिए इस स्थिति में ऋषि-मुनि हस्तक्षेप करके दोनों को वापस कराते थे। महाभारत में अर्जुन-अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्रों को टकराने से रोका गया था।





