विस्तृत उत्तर
नवनाग स्तोत्र की फलश्रुति स्पष्ट करती है:
'तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्'
अर्थात: जो कोई नित्य सायंकाल और विशेष रूप से प्रातःकाल इनका पाठ करता है, उसे विष का भय नहीं रहता और वह सभी स्थानों पर विजयी होता है।
यह स्तोत्र न केवल भौतिक विष (सर्प-दंश) से, बल्कि मानसिक विष (भय, शत्रु-बाधा, तंत्र-बाधा) से भी रक्षा करता है।





