विस्तृत उत्तर
हाँ, नवनाग स्तोत्र की फलश्रुति 'तस्य विषभयं नास्ति' स्पष्ट करती है कि यह न केवल भौतिक विष (सर्प-दंश) से, बल्कि मानसिक विष (भय, शत्रु-बाधा, तंत्र-बाधा) से भी रक्षा करता है।
कालसर्प योग से पीड़ित जातक को प्रायः अज्ञात भय, दुःस्वप्न (सांप दिखना) और विष-भय की समस्या रहती है — नवनाग स्तोत्र का नित्य प्रातः-सायं पाठ इन सभी के लिए एक अचूक रक्षा-कवच का कार्य करता है।





