का सरल उत्तर
हाँ, नवनाग स्तोत्र की फलश्रुति 'तस्य विषभयं नास्ति' के अनुसार यह भौतिक विष (सर्प-दंश) और मानसिक विष (भय, शत्रु-बाधा) दोनों से रक्षा करता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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