विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में रुद्राष्टाध्यायी के पाठ के पांच प्रमुख स्तर बताए गए हैं:
— रूपक या षडंग पाठ: संपूर्ण रुद्राष्टाध्यायी का एक बार यथाविधि पाठ।
— रुद्रीय एकादशिनी: पंचम अध्याय (शतरुद्रिय) का ११ बार पाठ।
— लघु रुद्र: एकादशिनी का ११ बार आवर्तन अर्थात् कुल १२१ पाठ (११ × ११)।
— महारुद्र: लघु रुद्र का ११ गुना अर्थात् १,३३१ पाठ। इसमें प्रायः ११ ब्राह्मण ११ दिनों तक पाठ करते हैं।
— अति रुद्र: महारुद्र का ११ गुना अर्थात् १४,६४१ पाठ। यह राष्ट्र-कल्याण और महाविपत्ति नाश के लिए किया जाता है।





