विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में रुद्रीय एकादशिनी का विधान है जिसमें पंचम अध्याय (शतरुद्रिय/नमकम्) का ११ बार पाठ किया जाता है।
इसके अतिरिक्त:
— लघु रुद्र में शतरुद्रिय का १२१ बार पाठ होता है (११ × ११)।
— महारुद्र में १,३३१ बार (१२१ × ११)।
— अति रुद्र में १४,६४१ बार (१,३३१ × ११)।
साधारण रुद्राभिषेक में प्रायः संपूर्ण रुद्राष्टाध्यायी का एक बार पाठ (रूपक/षडंग पाठ) किया जाता है।





