विस्तृत उत्तर
नमकम् (शतरुद्रिय) रुद्राष्टाध्यायी का पंचम और सबसे प्रधान अध्याय है, जिसके देवता महारुद्र हैं।
इसमें ६६ मन्त्र हैं जहाँ 'नमः' शब्द की बहुलता है। इसमें शिव को सेनापति, व्याध, शिल्पी, और दिशाओं के स्वामी के रूप में पूजा गया है।
दक्षिण भारत में इसे 'श्रीरुद्रम' के नाम से जाना जाता है और यह कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता में संकलित है। नमकम् में ११ अनुवाक हैं जो शिव के उग्र और सौम्य दोनों रूपों को नमन करते हैं।





