विस्तृत उत्तर
अनुष्ठानकर्ता (यजमान) को व्रत के दिन निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए:
— प्रातः काल से ही ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
— सात्विक आहार (अथवा उपवास) तथा मनसा-वाचा-कर्मणा पवित्रता धारण करनी चाहिए।
— तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज) का सर्वथा त्याग अनिवार्य है।
— असत्य भाषण और क्रोध का सर्वथा त्याग आवश्यक है।
— शिव आराधना के समय आलस्य और निद्रा को भी वर्जित माना गया है।
— यजमान को श्वेत अथवा हल्के रंग के बिना सिले अथवा शुद्ध (धुले हुए) सूती या रेशमी वस्त्र धारण करने चाहिए। काले वस्त्रों का सर्वथा निषेध किया गया है।
दिन के प्रातः, मध्याह्न और सायं — इन तीन विभागों में कर्मों का विभाजन किया गया है। प्रातःकाल दैनिक शास्त्र कर्म, मध्याह्न सकाम कर्म, तथा सायंकाल और निशीथ काल में शांति कर्म एवं अभीष्ट फल प्राप्ति हेतु शिव पूजन का विधान है।





