विस्तृत उत्तर
ब्रह्मचर्य का अर्थ यतियों, ब्रह्मचारियों और विशेष रूप से पत्नीरहित संन्यासियों के लिये मन, वचन और कर्म से मैथुन में प्रवृत्ति न रखना बताया गया है। यह यमों में शामिल संयम है। पाठ में इसके बाद गृहस्थों के लिये ब्रह्मचर्य की अलग व्याख्या दी गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि ब्रह्मचर्य का व्यवहार आश्रम और स्थिति के अनुसार समझाया गया है। मूल बात इन्द्रिय-संयम और अनुचित भोग से निवृत्ति है।
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