शिव साधनाशिव उपासना में गृहस्थ और संन्यासी की विधि में क्या भेद है?गृहस्थ: षोडशोपचार पूजा, कामना सहित, पत्नी सहित, व्रत-उपवास, सात्विक जीवन, मंदिर दर्शन। संन्यासी: निष्काम भक्ति, आत्मध्यान प्रधान, पूर्ण ब्रह्मचर्य, भस्म-रुद्राक्ष, एकांत साधना, समाधि-योग। समानता: शिव भक्ति भाव देखते हैं — सच्चे मन की पूजा सबको समान फल देती है।#गृहस्थ#संन्यासी#उपासना भेद
लोकद्वादशी को संन्यासी श्राद्ध क्यों?द्वादशी विष्णु-प्रिय और यतियों के योग्य है।#द्वादशी#संन्यासी#विष्णु
लोकसंन्यासी का श्राद्ध दशमी को होता है क्या?नहीं, संन्यासी का श्राद्ध द्वादशी को।#संन्यासी#द्वादशी#श्राद्ध
विशेष मृत्यु श्राद्धयति का श्राद्ध कब होता है?यति (संन्यासी) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को होता है। यति और संन्यासी समानार्थी। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित तिथि है।#यति श्राद्ध#द्वादशी#संन्यासी