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संन्यासी से जुड़े सभी प्रश्न(11)

संन्यासी पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 11 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव साधना

शिव उपासना में गृहस्थ और संन्यासी की विधि में क्या भेद है?

गृहस्थ: षोडशोपचार पूजा, कामना सहित, पत्नी सहित, व्रत-उपवास, सात्विक जीवन, मंदिर दर्शन। संन्यासी: निष्काम भक्ति, आत्मध्यान प्रधान, पूर्ण ब्रह्मचर्य, भस्म-रुद्राक्ष, एकांत साधना, समाधि-योग। समानता: शिव भक्ति भाव देखते हैं — सच्चे मन की पूजा सबको समान फल देती है।

#गृहस्थ#संन्यासी#उपासना भेद
यम

ब्रह्मचर्य का अर्थ क्या है?

यतियों, ब्रह्मचारियों और पत्नीरहित संन्यासियों के लिये मन, वचन और कर्म से मैथुन में प्रवृत्ति न रखना ब्रह्मचर्य है।

#ब्रह्मचर्य#यति#ब्रह्मचारी
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को फल किसने दिया?

आत्मदेव को पुत्र-प्राप्ति का फल उस संन्यासी योगी ने दिया, जिसने पहले उन्हें पुत्र-मोह छोड़ने को समझाया था।

#आत्मदेव#फल#संन्यासी
श्रीमद्भागवत

संन्यासी ने पुत्र मोह छोड़ने को क्यों कहा?

संन्यासी ने कहा कि कर्म की गति प्रबल है और पुत्र से सुख निश्चित नहीं; संतान के कारण सगर और अंग को भी दुख मिला।

#पुत्र मोह#संन्यासी#आत्मदेव
श्रीमद्भागवत

संन्यासी ने आत्मदेव को क्या बताया?

संन्यासी ने आत्मदेव को पुत्र-मोह छोड़ने, कर्म की गति को प्रबल मानने और विवेक से संसार-वासना त्यागने को कहा।

#संन्यासी#आत्मदेव#विवेक
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव संन्यासी से क्यों रोए?

आत्मदेव संतान-अभाव के दुख से रोए; वे कहते हैं कि उनका सब कुछ सूना हो गया है और वे प्राण त्यागने आए हैं।

#आत्मदेव#संन्यासी#संतान दुख
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को संतान क्यों नहीं थी?

संन्यासी ने आत्मदेव का प्रारब्ध देखकर कहा कि सात जन्म तक उन्हें किसी प्रकार संतान नहीं हो सकती।

#आत्मदेव#प्रारब्ध#संतान
लोक

द्वादशी को संन्यासी श्राद्ध क्यों?

द्वादशी विष्णु-प्रिय और यतियों के योग्य है।

#द्वादशी#संन्यासी#विष्णु
लोक

संन्यासी का श्राद्ध किस दिन करें?

द्वादशी तिथि को।

#संन्यासी#यति महालय#द्वादशी
लोक

संन्यासी का श्राद्ध दशमी को होता है क्या?

नहीं, संन्यासी का श्राद्ध द्वादशी को।

#संन्यासी#द्वादशी#श्राद्ध
विशेष मृत्यु श्राद्ध

यति का श्राद्ध कब होता है?

यति (संन्यासी) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को होता है। यति और संन्यासी समानार्थी। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित तिथि है।

#यति श्राद्ध#द्वादशी#संन्यासी
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