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विस्तृत उत्तर
सत्य बोलने का सही तरीका यह बताया गया है कि जैसा देखा, सुना, अनुमान किया या स्वयं अनुभव किया गया हो, उसे ठीक उसी तरह दूसरों को कष्ट न पहुँचाते हुए कहना चाहिए। पाठ में यह भी कहा गया है कि अश्लील बातें नहीं करनी चाहिए और दूसरों के दोष जानकर भी उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से नहीं कहना चाहिए। इसलिए सत्य केवल तथ्य कहना नहीं, बल्कि अहित और कष्ट से बचते हुए यथार्थ वाणी रखना है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 42, श्लोक 13-14
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