लोकपुष्कर द्वीप के मानसोत्तर पर्वत पर किन देवताओं की राजधानियाँ हैं?मानसोत्तर पर्वत पर इन्द्र (पूर्व), यम (दक्षिण), वरुण (पश्चिम) और चंद्र देव (उत्तर) की राजधानियाँ हैं। यह स्वर्लोक का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है।#मानसोत्तर पर्वत#पुष्कर द्वीप#इन्द्र
लोकमानसोत्तर पर्वत क्या है?मानसोत्तर 10,000 योजन ऊँचा पर्वत है जो पुष्कर द्वीप के मध्य में है। इस पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं — यह स्वर्लोक का प्रशासनिक केंद्र है।#मानसोत्तर पर्वत
लोकब्रह्मपुरी को कौन घेरे हुए है?ब्रह्मपुरी को आठ दिक्पालों की नगरियाँ घेरे हैं — इन्द्र, अग्नि, यम, निर्ऋति, वरुण, वायु, कुबेर और ईश (शिव)।#ब्रह्मपुरी#अष्टदिक्पाल#इन्द्र
यमचोरी न करना योग में क्यों जरूरी है?विपत्ति में भी मन, वचन और कर्म से दूसरों का द्रव्य न लेना अस्तेय है।#अस्तेय#चोरी न करना#मन वचन कर्म
यमसत्य बोलने का सही तरीका क्या बताया गया है?जो देखा, सुना, अनुमान या अनुभव किया हो, उसे दूसरों को कष्ट दिए बिना यथार्थ कहना सत्य है।#सत्य#वाणी#दूसरों को कष्ट न देना
यमअहिंसा का असली अर्थ क्या बताया गया है?सभी प्राणियों में आत्मवत् दृष्टि रखकर उनके हित में प्रवृत्त रहना अहिंसा कहा गया है।#अहिंसा#आत्मवत दृष्टि#प्राणी हित
यमयोग में यम का मतलब क्या है?तप में प्रवृत्ति और विषय-भोगों से निवृत्ति को यम कहा गया है। अहिंसा इसका पहला हेतु है।#यम#तप#विषय निवृत्ति
अष्टांग योगअष्टांग योग क्या होता है?अष्टांग योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।#अष्टांग योग#यम#नियम
लोकयमराज के 14 नाम कौन-कौन से हैं?यमराज के 14 नाम हैं: यम, धर्मराज, मृत्यु, अन्तक, वैवस्वत, काल, सर्वभूतक्षय, औदुम्बर, दध्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त।#यमराज 14 नाम#धर्मराज#वैवस्वत
पौराणिक कथानचिकेता यमराज कथा से क्या शिक्षा कठोपनिषदशिक्षाएं: श्रेय (ज्ञान) चुनो, प्रेय (भोग) नहीं। सत्य पर दृढ़ रहो। भोग अस्थायी, ज्ञान शाश्वत। आत्मा अमर — मृत्यु भय व्यर्थ। बुद्धि (विवेक) से इंद्रियां नियंत्रित करो (रथ रूपक)। शुद्ध जिज्ञासा सर्वशक्तिमान — बालक ने मृत्यु से अमरत्व सीखा।#नचिकेता#कठोपनिषद#यम
हिंदू दर्शनकठोपनिषद में यम नचिकेता संवाद का सार क्याकठोपनिषद: बालक नचिकेता ने यमराज से तीन वर मांगे — तीसरा: 'मृत्यु के बाद आत्मा है?' यम का उपदेश: श्रेय (ज्ञान) > प्रेय (भोग); आत्मा अमर (1.2.18); रथ रूपक — शरीर=रथ, बुद्धि=सारथी, आत्मा=स्वामी। सार: भोग-भय से परे आत्मज्ञान ही जीवन लक्ष्य।#कठोपनिषद#यम#नचिकेता