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विस्तृत उत्तर
जनलोक महान नैष्ठिक ब्रह्मचारियों का शाश्वत निवास स्थान है। चार कुमार जन्म से ही पूर्ण ज्ञान और वैराग्य में स्थित थे। ब्रह्मा जी के विवाह और सृष्टि-विस्तार के आदेश को स्वीकार करने के बजाय उन्होंने अखंड नैष्ठिक ब्रह्मचर्य का व्रत लिया। नैष्ठिक ब्रह्मचारी वह होता है जो जीवन भर अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करता है और ऊर्ध्वरेता रहता है। जनलोक ऐसे ही ब्रह्मचर्य, वैराग्य और ज्ञान में स्थित साधकों का लोक माना गया है।
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