विस्तृत उत्तर
शिवजी ने सतीजी को दक्ष यज्ञ में जाने से इसलिये रोका क्योंकि दक्ष ने न्योता नहीं भेजा था और शिवजी जानते थे कि दक्ष उनसे वैर रखता है — बिना बुलाये जाने पर अपमान निश्चित था।
शिवजी ने कहा — 'दच्छ सकल निज सुता बोलाई। हमरें बयर तुम्हउ बिसराई॥' — दक्ष ने सब पुत्रियों को बुलाया पर हमारे वैर के कारण तुम्हें भुला दिया।
फिर कहा — 'ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना। जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। रहइ न सीलु सनेहु न कानी॥'
अर्थ — एक बार ब्रह्माकी सभामें दक्ष हमसे अप्रसन्न हो गये थे, तभीसे वे अब भी अपमान करते हैं। हे भवानी! यदि तुम बिना बुलाये जाओगी तो न शील (शिष्टाचार) रहेगा, न स्नेह और न मान-मर्यादा रहेगी।
शिवजी की चेतावनी के तीन कारण थे:
- 1न्योता नहीं आया — बिना बुलाये जाना अपमान है
- 2दक्ष का पुराना वैर — ब्रह्मसभा से दक्ष शिवजी से नाराज़ थे
- 3अपमान निश्चित है — वहाँ जाकर कष्ट ही मिलेगा





