विस्तृत उत्तर
भागवत कथा को दारिद्र्य और दुख में सहारा देने वाली कहा गया है। पाठ में कहा गया है कि जो लोग दारिद्र्य की दुखरूपी ज्वाला से दग्ध हो रहे हैं, जिन्हें माया-पिशाची ने रौंद डाला है और जो संसार-सागर में डूब रहे हैं, उनके कल्याण के लिये श्रीमद्भागवत सिंहनाद कर रही है। यह चित्र बताता है कि भागवत कथा केवल विद्वानों के लिये नहीं, बल्कि दुख से जले हुए, मोह से दबे हुए और जीवन-सागर में डूबते लोगों के लिये है। कथा उन्हें भगवान की ओर बुलाती है, भक्ति को स्थिर करती है और हृदय में हरि की उपस्थिति का मार्ग खोलती है। इसलिए दारिद्र्य और दुख में भागवत आश्रय, औषधि और कल्याण-ध्वनि की तरह प्रस्तुत होती है।
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