विस्तृत उत्तर
यह स्कंद पुराण में वर्णित प्रदोष-महिमा का सर्वोच्च उद्घोष है। इसका मूल श्लोक है: 'सत्यं ब्रवीमि परलोकहितं ब्रवीमि... संसारमुल्बणमसारमवाप्य जन्तोः सारोऽयमीश्वरपदाम्बुरुहस्य सेवा ॥'। इसका भावार्थ है कि इस भयंकर और असार संसार में जन्म लेकर, प्राणी के लिए एकमात्र सार-वस्तु भगवान शिव के चरण-कमलों की सेवा ही है।





