विस्तृत उत्तर
जालंधर की कथा मुख्य रूप से शिव पुराण की रुद्र संहिता के युद्ध खंड में प्रसिद्ध रूप से आती है। इसके अतिरिक्त पद्म पुराण और स्कंद पुराण की परंपराओं में भी वृंदा, तुलसी और शालिग्राम प्राकट्य से जुड़े प्रसंग मिलते हैं। अलग-अलग पुराणों में वृंदा की वंशावली, कथा की शैली और कुछ घटनाओं के विवरण में भिन्नताएँ मिल सकती हैं, पर मूल कथा समान रहती है: शिव की क्रोधाग्नि से जालंधर का जन्म, वृंदा के सतीत्व से उसकी अजेयता, विष्णु की योगमाया, वृंदा का श्राप और तुलसी-शालिग्राम की स्थापना।
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