विस्तृत उत्तर
बिल्वाष्टकम् के छठे श्लोक (लक्ष्भ्याः स्तनूत उत्पन्नं, महादेवस्य च प्रियम्...) के अनुसार, महादेव को अत्यंत प्रिय उस बिल्व वृक्ष की उत्पत्ति भगवती लक्ष्मी के वक्षस्थल (सीने) से हुई है। इसी कारण यह लक्ष्मी (धन और समृद्धि) प्रदान करने वाला स्वरूप भी है।




