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विस्तृत उत्तर
वायु पुराण में वैराज देवगणों की उत्पत्ति का संबंध ब्रह्मा जी के विराज स्वरूप से बताया गया है। सृष्टि के आदिकाल में ब्रह्मा जी ने अपने शरीर को दो भागों में विभक्त किया, जिससे पुरुष और शतरूपा की उत्पत्ति हुई। इसी विराज या विराट स्वरूप से उत्पन्न होने के कारण इन देवताओं को वैराज कहा जाता है। वे ब्रह्मांड के आदिकाल में उत्पन्न अत्यंत तेजोमय, सात्त्विक और पवित्र सत्ताएँ हैं, जो भौतिक सीमाओं से परे हैं।
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