विस्तृत उत्तर
52 शक्तिपीठ — सती के शरीर के 52 अंगों से उत्पन्न:
पौराणिक कथा
- 1दक्ष यज्ञ: दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया — शिव को आमंत्रित नहीं किया।
- 2सती आत्मदाह: सती (शिव पत्नी, दक्ष पुत्री) पिता के यज्ञ में गईं — शिव का अपमान देख यज्ञ अग्नि में कूद गईं।
- 3शिव तांडव: शिव ने सती का शव उठाकर तांडव किया — सृष्टि संकट।
- 4विष्णु का सुदर्शन: विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव को विभक्त किया — 52 अंग 52 स्थानों पर गिरे।
- 5शक्तिपीठ: जहां-जहां अंग गिरे = शक्तिपीठ। प्रत्येक स्थान पर शक्ति (देवी) + भैरव (शिव) विराजमान।
प्रमुख शक्तिपीठ: कामाख्या (योनि), काशी (मणिकर्णिका — कर्णाभूषण), कोलकाता (कालीघाट — दाहिने पैर की उंगलियां), हिंगलाज (ब्रह्मरंध्र), नैना देवी (नेत्र), ज्वालामुखी (जिह्वा)।
संख्या: 51 या 52 — ग्रंथों में मतभेद (4/18/51/52)।





