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शक्तिपीठ📜 शिव पुराण, देवी भागवत, मार्कण्डेय पुराण1 मिनट पठन

52 शक्तिपीठों की उत्पत्ति कैसे हुई — पौराणिक कथा?

संक्षिप्त उत्तर

दक्ष यज्ञ → सती आत्मदाह → शिव तांडव → विष्णु सुदर्शन → 52 अंग 52 स्थानों पर गिरे = शक्तिपीठ। प्रत्येक = शक्ति + भैरव। कामाख्या, काशी, कालीघाट, हिंगलाज, नैना देवी प्रमुख।

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विस्तृत उत्तर

52 शक्तिपीठ — सती के शरीर के 52 अंगों से उत्पन्न:

पौराणिक कथा

  1. 1दक्ष यज्ञ: दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया — शिव को आमंत्रित नहीं किया।
  2. 2सती आत्मदाह: सती (शिव पत्नी, दक्ष पुत्री) पिता के यज्ञ में गईं — शिव का अपमान देख यज्ञ अग्नि में कूद गईं।
  3. 3शिव तांडव: शिव ने सती का शव उठाकर तांडव किया — सृष्टि संकट।
  4. 4विष्णु का सुदर्शन: विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव को विभक्त किया — 52 अंग 52 स्थानों पर गिरे।
  5. 5शक्तिपीठ: जहां-जहां अंग गिरे = शक्तिपीठ। प्रत्येक स्थान पर शक्ति (देवी) + भैरव (शिव) विराजमान।

प्रमुख शक्तिपीठ: कामाख्या (योनि), काशी (मणिकर्णिका — कर्णाभूषण), कोलकाता (कालीघाट — दाहिने पैर की उंगलियां), हिंगलाज (ब्रह्मरंध्र), नैना देवी (नेत्र), ज्वालामुखी (जिह्वा)।

संख्या: 51 या 52 — ग्रंथों में मतभेद (4/18/51/52)।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, देवी भागवत, मार्कण्डेय पुराण
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