विस्तृत उत्तर
दिव्यास्त्रों की उत्पत्ति की कथा 'अहिर्बुध्न्य संहिता' में मिलती है। इसके अनुसार सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र की शक्ति से सौ से अधिक अस्त्रों का निर्माण किया था। इन अस्त्रों का उद्देश्य धर्म की स्थापना करना था। इस दिव्य शस्त्रागार में हर स्थिति के लिए एक अस्त्र था। कुछ अस्त्र जैसे ब्रह्मास्त्र या पाशुपतास्त्र प्रलयंकारी थे और पूरी सृष्टि का विनाश कर सकते थे, जबकि कुछ अस्त्र सामरिक महत्व के थे जिन्हें युद्ध के मैदान में बढ़त हासिल करने के लिए बनाया गया था।
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