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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतखण्ड में बताया गया है कि जब सृष्टि का पुनः निर्माण हो रहा था, तब ब्रह्मा जी को ऐसे प्राणियों की आवश्यकता थी जो लोक-व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान रखते हों। तब सभी देवताओं की स्तुति से प्रेरणा प्राप्त कर ब्रह्मा जी ने अपनी तपस्या के प्रभाव से अत्यंत तेजस्वी और विशाल नेत्रों वाले श्रवण देवों को उत्पन्न किया। ये देव वस्तुतः ब्रह्मा जी के कानों और नेत्रों के प्रतीक हैं, जो पूरे ब्रह्मांड में विचरण करते हैं।
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