विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार अतल लोक मोक्ष का मार्ग नहीं है बल्कि यह भौतिक सुखों के भोग के माध्यम से अर्जित पुण्यों को समाप्त करने का एक मायावी स्थान है। जब इन जीवों के पुण्यों की अवधि समाप्त हो जाती है तो उन्हें पुनः कर्मचक्र के अनुसार मृत्युलोक (पृथ्वी) पर लौटना पड़ता है। यहाँ का जीवन अज्ञानता में व्यतीत होता है। इन निवासियों के पास अकूत संपत्ति, सुंदर स्त्रियाँ और स्वर्ण होता है किंतु उनमें आध्यात्मिक दृष्टि का पूर्णतः अभाव होता है। वे इतने संपन्न होते हैं कि उन्हें लगता ही नहीं कि उन्हें किसी आध्यात्मिक विकास या ईश्वर की आवश्यकता है।
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