विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार यमपुरी के चार मुख्य दिशाओं में चार द्वार हैं और जीवात्मा का प्रवेश उसके कर्मों के आधार पर निर्धारित द्वार से होता है। पापी आत्माएँ दक्षिण द्वार से प्रवेश करती हैं। दान-पुण्य, धर्म रक्षा, गौ, भूमि या विद्या का दान करने वाली आत्माएँ पश्चिमी द्वार से जाती हैं। सत्य बोलने, माता-पिता की निष्काम सेवा करने और मन, वचन, कर्म से अहिंसा का पालन करने वालों को उत्तर द्वार मिलता है। सिद्ध योगी, ऋषि, ज्ञानी और संबुद्ध आत्माएँ पूर्व द्वार से प्रवेश करती हैं। इस प्रकार यमपुरी का द्वार जीव के जीवनभर के कर्मों से निर्धारित होता है।
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