विस्तृत उत्तर
नीलकंठ शिव का एक अत्यंत प्रसिद्ध और पौराणिक नाम है। 'नीलकंठ' का शाब्दिक अर्थ है — नीला कंठ (गला)।
नामकरण की कथा — समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और दानवों ने मंदर पर्वत को मथनी बनाकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उसमें से सबसे पहले भयानक हलाहल (कालकूट) विष निकला। यह विष इतना शक्तिशाली था कि इससे समस्त सृष्टि का नाश हो सकता था। देवता भयभीत होकर भगवान शिव की शरण में गए।
शिव का महान त्याग — भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए वह महाविष स्वयं पी लिया। उनकी अर्धांगिनी माँ पार्वती ने तुरंत उनका कंठ पकड़ लिया ताकि विष नीचे न उतरे। विष कंठ में ही रुक गया। उसके प्रभाव से कंठ नीला हो गया परंतु शिव का शरीर अक्षुण्ण रहा।
तब से — उनके कंठ के नीले पड़ने के कारण वे 'नीलकंठ' कहलाए। यह नाम उनके परमार्थी और समस्त सृष्टि के रक्षक स्वरूप का प्रतीक है।




