नाम महिमा एवं भक्तिशिव नाम जपने से क्या होता है'ॐ नमः शिवाय' यजुर्वेद का पंचाक्षरी मंत्र है जिसके पाँच अक्षर पाँच तत्वों के प्रतीक हैं। शिव जप से तीनों तापों से मुक्ति मिलती है। शिव 'आशुतोष' हैं — शीघ्र प्रसन्न होने वाले — इसलिए उनका नाम जपने से शीघ्र कृपा मिलती है।#शिव नाम#ॐ नमः शिवाय#पंचाक्षर मंत्र
शिव नाम महिमाशिव को शंभू क्यों कहते हैंशंभू = 'शं' (शुभ, कल्याण) + 'भू' (स्वरूप) = आनंद-स्वरूप, कल्याण के साकार रूप। शिव स्वयं परमानंद हैं और भक्तों को भी आनंद देते हैं — इसीलिए 'शंभू'। वे अनंत, अनादि और सृष्टि के संचालक हैं।#शंभू#आनंद स्वरूप
शिव नाम महिमाशिव को उमापति क्यों कहते हैंउमापति = उमा (पार्वती) के पति। 'उमा' नाम उनकी माँ द्वारा 'उ! मा!' कहने से पड़ा। यह नाम शिव के गृहस्थ, प्रेमपूर्ण और परम-भक्त-वत्सल स्वरूप को दर्शाता है। एक ओर महायोगी, दूसरी ओर उमा के परम प्रेमी।#उमापति#पार्वती पति#शिव नाम
शिव नाम महिमाशिव को रुद्र क्यों कहते हैंरुद्र = 'रुत्' (दुख) + 'द्र' (हरने वाला) — दुखों को हरने वाले देव। यह शिव का वेदों में मूल नाम है। यजुर्वेद के रुद्रम् में 'नमस्ते रुद्र मन्यव' से इनका स्तवन है। रुद्र सौम्य और उग्र — दोनों स्वरूपों में विराजते हैं।#रुद्र#दुख हरण#वेद नाम
शिव नाम महिमाशिव को आशुतोष क्यों कहते हैंआशुतोष = शीघ्र प्रसन्न होने वाले। एक बेलपत्र, एक लोटा जल — इतने से संतुष्ट हो जाते हैं। रावण-भस्मासुर जैसों को भी वरदान दिया। 'ॐ आशुतोषाय नमः' इनकी शीघ्र कृपा के लिए मंत्र है।#आशुतोष#शीघ्र प्रसन्न#भक्त वत्सल
शिव नाम महिमाशिव को पशुपति क्यों कहते हैंपशुपति = जीवात्माओं के स्वामी। 'पशु' = माया-बंधन में जकड़ी आत्मा, 'पति' = उस बंधन से मुक्त कराने वाले स्वामी। शिव समस्त जीव-जगत और बद्ध आत्माओं के रक्षक-मुक्तिदाता हैं। यजुर्वेद के रुद्रम् में इसका उल्लेख है।#पशुपति#पशुपतिनाथ#जीव स्वामी
शिव नाम महिमाशिव को त्रिलोचन क्यों कहते हैंत्रिलोचन = तीन नेत्रों वाले। दायाँ = सूर्य, बायाँ = चंद्र, तृतीय = अग्नि (दिव्य ज्ञान)। तृतीय नेत्र घोर अधर्म पर खुलता है — कामदेव को भस्म किया। यह आज्ञा-चक्र और परम ज्ञान का प्रतीक है।#त्रिलोचन#तीसरा नेत्र#तृतीय नयन
शिव नाम महिमाशिव को महाकाल क्यों कहा जाता हैमहाकाल = समय के महान अधिपति। शिव समस्त काल-चक्र के स्वामी हैं — जन्म से मृत्यु तक सब उनके अधीन है। वे मृत्युंजय भी हैं — मृत्यु को भी जीतने वाले। उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इसी रूप का प्रतीक है।#महाकाल#काल#समय
शिव नाम महिमाशिव को भोलेनाथ क्यों कहते हैंभोलेनाथ = सरल, निष्कपट और सहजता से प्रसन्न होने वाले प्रभु। एक लोटा जल और बेलपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं। रावण-भस्मासुर जैसे असुरों को भी वरदान दिया। यही उनकी भोली प्रकृति है।#भोलेनाथ#आशुतोष#शिव सरलता
शिव नाम महिमाशिव को नीलकंठ क्यों कहते हैंसमुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने संसार की रक्षा के लिए पी लिया। पार्वती ने कंठ पकड़ा जिससे विष नीचे नहीं उतरा — कंठ नीला हो गया। इसीलिए शिव 'नीलकंठ' कहलाए।#नीलकंठ#समुद्र मंथन#हलाहल विष
शिव नाम महिमाभगवान शिव को महादेव क्यों कहा जाता हैमहादेव = 'महान देव' — सभी देवताओं में श्रेष्ठ। शिव संहार के अधिपति हैं जो सृष्टि का सबसे शक्तिशाली कार्य है। सभी से समदृष्टि रखते हैं — देव, दानव, साधु, भक्त — सब पर समान कृपा। इसीलिए वे 'देवों के देव महादेव' हैं।#महादेव#शिव नाम#देवाधिदेव