विस्तृत उत्तर
आशुतोष' का सन्धि-विच्छेद है — 'आशु' = शीघ्र + 'तोष' = संतुष्ट। अर्थात जो शीघ्र ही संतुष्ट और प्रसन्न हो जाए।
कारण — भगवान शिव को प्रसन्न करना सभी देवताओं में सबसे सरल माना गया है। उनकी प्रसन्नता के लिए महँगी सामग्री, जटिल विधि या लंबे अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं। सच्चे मन से की गई थोड़ी सी भक्ति भी उन्हें प्रसन्न कर देती है।
शास्त्रीय प्रमाण — 'भोलेनाथ भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। न कोई पाखंड, न कोई कर्मकांड। बस भक्त के मन की मधुर भावनाएँ शिव को निहाल कर देती हैं।' हिन्दवी में उद्धृत दोहे में मतिराम कहते हैं — 'धतूरे के पुष्प चढ़ाकर ही तीनों लोकों का आधिपत्य प्राप्त किया जा सकता है।'
व्यावहारिक उदाहरण — रावण, भस्मासुर, बाण आदि ने थोड़ी सी साधना से विशाल वरदान पाए। यही उनका आशुतोष स्वभाव है।
आशुतोष का मंत्र — 'ॐ आशुतोषाय नमः' — यह मंत्र शिव की शीघ्र कृपा के लिए जपा जाता है।





