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विस्तृत उत्तर
पार्वती जी ने शिव जी का गला इसलिए पकड़ा ताकि हलाहल विष उनके पेट में न जाए। शिव जी ने सृष्टि की रक्षा के लिए विष पी लिया था, लेकिन यदि वह विष उनके भीतर चला जाता तो उनके हृदय में स्थित चराचर जगत को हानि हो सकती थी। माता पार्वती ने करुणा और सावधानी से उनका कंठ पकड़ लिया। इससे विष गले में ही रुक गया। विष के प्रभाव से शिव जी का कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। यह प्रसंग शिव और शक्ति की संयुक्त करुणा का सुंदर उदाहरण है।
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