पौराणिक रहस्यप्रदोष में शिव पूजा क्यों होती है?समुद्र मंथन से निकले जहर को शिव जी ने इसी समय पीकर दुनिया को बचाया था और 'आनंद तांडव' किया था। इसलिए इस समय शिव पूजा का सबसे ज्यादा महत्व है।#समुद्र मंथन#हलाहल विष#आनंद तांडव
शिव स्वरूपशिव जी का नटराज रूप क्या है?नटराज = नृत्य के राजा शिव। चार भुजाएं: डमरू (सृष्टि), अग्नि (प्रलय), अभयमुद्रा (रक्षा), गजहस्त (मोक्ष)। अपस्मार दानव को पैर से कुचला = अज्ञान पर विजय। CERN में भी नटराज की प्रतिमा है — ब्रह्मांडीय ऊर्जा चक्र के प्रतीक के रूप में।#नटराज#तांडव
शिव स्वरूपशिव जी का नटराज रूप क्या है?नटराज शिव का नृत्य स्वरूप है। डमरू (सृष्टि), अग्नि (संहार), अभय मुद्रा (रक्षा), माया को पाँव से दबाना और उठा पाँव (मोक्ष) — ये पाँच ब्रह्मांडीय क्रियाओं के प्रतीक हैं। CERN में भी नटराज की प्रतिमा है।#नटराज#तांडव#आनंद तांडव