📖
विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन से जुड़ी लक्ष्मी जी की कथा इंद्र के श्राप से शुरू होती है। दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण स्वर्ग श्रीहीन हो गया और लक्ष्मी जी क्षीरसागर में चली गईं। जब देवता और असुर क्षीरसागर का मंथन करने लगे, तब अनेक रत्नों के साथ माता लक्ष्मी स्वर्ण कमल पर प्रकट हुईं। उनका रूप देखकर देवता, असुर और ऋषि सभी मोहित हुए। लक्ष्मी जी ने सबको देखकर भगवान विष्णु को अपना शाश्वत पति चुना। उनके विष्णु के वक्षस्थल में विराजने से धर्म, श्री और पालन का संतुलन पुनः स्थापित हुआ।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?
