विस्तृत उत्तर
जालंधर ने देवताओं से युद्ध इसलिए किया क्योंकि उसे पता चला कि समुद्र मंथन के समय देवताओं ने समुद्र से निकले रत्न, अमृत और दिव्य वस्तुएँ ले ली थीं। समुद्र को जालंधर का पालक-पिता माना गया था, इसलिए उसने इसे अपने पिता के अधिकारों का हरण समझा। दैत्यगुरु शुक्राचार्य से यह बात सुनकर उसके भीतर प्रतिशोध की अग्नि भड़क उठी। वृंदा के पतिव्रत से सुरक्षित होकर उसने देवताओं पर आक्रमण किया। उसने इंद्र को हराया, स्वर्ग पर अधिकार किया और देवताओं की संपदाएँ छीन लीं।
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