विस्तृत उत्तर
महाभारत काल के राजा नल का जीवन इस योग के फलों से बिल्कुल मेल खाता है। जैसे नल योग में 'शारीरिक विकृति' और 'अपार कौशल' मिलता है, वैसे ही राजा नल विष के कारण 'बाहुक' (कुबड़े) बन गए थे, लेकिन वे रथ चलाने और खाना पकाने में अद्वितीय थे। राजा नल ने अपना खोया हुआ राज्य और धन अपनी रणनीति से वापस पाया था, जो इस योग का मुख्य फल है। इसके अलावा 'नल' का मतलब 'कमलनाल' भी होता है जो पानी के बहाव में मुड़ तो जाता है लेकिन टूटता नहीं।





