विस्तृत उत्तर
ब्रह्मास्त्र अत्यंत दुर्लभ और गोपनीय अस्त्र था। रामायण और महाभारत दोनों कालों में यह केवल गिने-चुने विशिष्ट योद्धाओं के पास था।
रामायण काल में — श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण, मेघनाद, परशुराम और महर्षि वशिष्ठ के पास ब्रह्मास्त्र का उल्लेख मिलता है।
महाभारत काल में — द्रोणाचार्य (परशुराम से प्राप्त), अश्वत्थामा (द्रोण से प्राप्त), भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन (द्रोण से प्राप्त), कर्ण, युधिष्ठिर, कुवलाश्व और प्रद्युम्न के पास इस अस्त्र का वर्णन है।
गुरु-शिष्य परंपरा — ब्रह्मास्त्र केवल योग्य गुरु ही योग्य शिष्य को दे सकते थे। इसकी दीक्षा और मंत्र अत्यंत गोपनीय थे। जो योद्धा इसका दुरुपयोग करे या इसे अपात्र को दे, उसे दण्डित होना पड़ता था।





