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विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन से निकला ऐरावत हाथी देवराज इंद्र को मिला। ऐरावत को चार दांतों वाला, अत्यंत विशाल और दिव्य कांति से युक्त हाथी बताया गया है। वह राजसत्ता, बादलों, वर्षा और इंद्र के वैभव का प्रतीक माना जाता है। इंद्र पहले दुर्वासा के श्राप से अपना ऐश्वर्य खो चुके थे, इसलिए ऐरावत का पुनः मिलना स्वर्ग की शक्ति और प्रतिष्ठा की वापसी का संकेत था। समुद्र मंथन के बाद इंद्र ने ऐरावत को अपने वाहन के रूप में स्वीकार किया। यही ऐरावत आगे भी इंद्र के वाहन के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
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