विस्तृत उत्तर
धन्वंतरि और मोहिनी अवतार समुद्र मंथन के प्रसंग से जुड़े हुए हैं। बारहवीं बार भगवान धन्वंतरि के रूप में अमृत लेकर समुद्र से प्रकट हुए। तेरहवीं बार उन्होंने मोहिनी रूप धारण किया। मोहिनी रूप में उन्होंने दैत्यों को मोहित किया और देवताओं को अमृत पिलाया। पाठ इस प्रसंग को संक्षेप में कहता है, इसलिए इससे अधिक कथा-विस्तार जोड़ना उचित नहीं है। धन्वंतरि अवतार अमृत के प्रकट होने से और मोहिनी अवतार देवताओं को अमृत दिलाने तथा दैत्यों को मोहित करने से जुड़ा है। दोनों रूप भगवान की लीला में देवकार्य की पूर्ति और अमृत-वितरण के प्रसंग को पूरा करते हैं।
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